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गुरुवार, 7 मार्च 2013

एक कहानी- शरणदाता' - अज्ञेय

www.vikalpvimarsh.in में आज अज्ञेय के जन्मजिवस पर पढ़ें उनकी एक रचना...
शरणदाता' - अज्ञेय
रंफीकुद्दीन का आश्वासन पाकर देविन्दरलाल रह गये। तब यह तय हुआ कि अगर खुदा न करे कोई खतरे की बात हुई ही, तो रंफीकुद्दीन उन्हें पहले खबर भी कर देंगे और हिंफाजत का इंतजाम भी कर देंगेचाहे जैसे हो। देविन्दरलाल की स्त्री तो कुछ दिन पहले ही जालन्धर मायके गयी हुई थी, उसे लिख दिया गया कि अभी न आये, वहीं रहे। रह गये देविन्दर और उनका पहाड़िया नौकर सन्तू। किन्तु यह व्यवस्था बहुत दिन नहीं चली। चौथे ही दिन सवेरे उठकर उन्होंने देखा, सन्तू भाग गया है।...पूरी पढ़ें..

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मंगलवार, 5 मार्च 2013

वैटिकन में महिला अधिकार


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वैटिकन में महिला अधिकार!
इतालवी मूल के सांद्री का नाम भी पोप की रेस में चल रहा है, जिनका मानना है कि महिलाओं को वैटिकन के प्रशासन में ज्यादा अधिकार देने से सिर्फ बेहतर ही हो सकता है क्योंकि "वे अपनी योग्यता के आधार पर अच्छा सहयोग दे सकती हैं." कैथोलिक चर्च का कहना है कि महिलाएं पादरी नहीं बन सकतीं क्योंकि खुद ईसा मसीह ने अपने उत्तराधिकार में सिर्फ पुरुषों को जगह दी थी. सांद्री ने इस मसले पर कुछ नहीं कहा.....पूरा पढ़ें..
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सोमवार, 4 मार्च 2013


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 " रेणु " के जन्मदिवस पर पढ़ें...
एक आदिम रात्रि की महक -- फणीश्वरनाथ 'रेणु'
करमा पूछना चाहता था कि नए 'पोख्ता' मकान में बाबू को भी चूने की गंध लगती है क्या? कनपटी के पास दर्द रहता है हमेशा क्या?...बाबू कोई गीत गुनगुनाने लगे। एक कुत्ता गश्त लगाता हुआ सिगनल-केबिन की ओर से आया और बरामदे के पास आ कर रुक गया। करमा चुपचाप कुत्ते की नीयत को ताड़ने लगा। ....
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सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

इस बार एक कविता
क्या गलत कह दिया---जसीम मोहम्मद
न्यायमूर्ति काटजू ने कोई नई बात नहींं कही। गुजरात जनसंहार में मोदी का हाथ होना कोई छिपा तथ्य नहींं है। न्यायमूर्ति काटजू ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए उक्त तथ्य को उजागर किया। गुजरात दंगों की वजह से बेघर हुए बहुत से लोगों की त्रासदी अभी खत्म नहींं हुई है। पिछले दिनों राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने राज्य के छियालीस में से सत्रह शरणार्थी शिविरों का दौरा करने के बाद कहा कि दंगा पीड़ित पांच हजार से अधिक परिवार आज भी अत्यंत अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।........पूरा पढ़ें....
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