नवउदारवादी नीतियों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों का संघर्ष काफी पुराना है-अरुण कान्त शुक्ला
20 एवं 21 फरवरी को होने वाली यह पंद्रहवीं हड़ताल दुनिया के कोने कोने में नवउदारवादी नीतियों के खिलाफ चल रहे संघर्षों का हिस्सा है। इसमें केवल मजदूरों की मांगें नहीं हैं, यह हड़ताल देश के उन करोड़ों लिए है , जो रात दिन खटते हैं लेकिन दो जून की रोटी सम्मान के साथ जुटा पाना जिनके लिए दुश्वार होता है। यह नवउदारवादी नीतियों के खिलाफ कामगारों गुस्सा है
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मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013
समकालीन विमर्श का एक महत्वपूर्ण पोर्टल
समकालीन विमर्श का एक महत्वपूर्ण पोर्टल शुरु किया है जिसमें समसामयिक मुद्दों पर सार्थक नए आलेखों के साथ साथ विभिन्न माध्यमों में प्रकाशित स्तरीय आलेखों का साभार प्रकाशन किया जाता है ।
कृपया हमारी वेबसाइट www.vikalpvimarsh.in पर जाएं और अपने सुझाव दें ताकि इसे और भी बेहतर बनाया जा सके ।
संपादक
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सोमवार, 18 फ़रवरी 2013
www.vikalpvimarsh.in समकालीन विमर्श का एक महत्वपूर्ण पोर्टल
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समकालीन विमर्श का एक महत्वपूर्ण पोर्टल शुरु किया है जिसमें समसामयिक मुद्दों पर सार्थक नए आलेखों के साथ साथ विभिन्न माध्यमों में प्रकाशित स्तरीय आलेखों का साभार प्रकाशन किया जाता है ।
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शनिवार, 16 फ़रवरी 2013
पुस्तक चर्चा---किस्सा कोताह- लेखक राजेश जोशी
समकालीन विमर्श का एक महत्वपूर्ण पोर्टल शुरु किया है जिसमें समसामयिक मुद्दों पर सार्थक आलेखों का प्रकाशन किया जाएगा । इसमें स्तंत्र एवं अप्रकाशित लेख / जानकारियों के अलावा अन्य वेबसाइट/ ब्लॉग एवं प्रिंट मीडिया में प्रकाशित महत्वपूर्ण जानकारियां एवं आलेख भी साभार प्रकाशित किए जाते हैं । कृपया हमारी वेबसाइट www.vikalpvimarsh.in पर जाएं और अपने सुझाव दें ताकि इसे और भी बेहतर बनाया जा सके
इस बार पुस्तक चर्चा में पढ़ें..
पुस्तक चर्चा---किस्सा कोताह- लेखक राजेश जोशी
जीवेश प्रभाकर
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शनिवार, 12 मई 2012
शनिवार, 23 फ़रवरी 2008
रचना-1
रचना-1जान पहचान
बंबई की तरह
गुम हो गई यह बात भी
कि बंबई में एक पडोसी कभी
नही जानता था अपने पडोसी को ।
आज , मुंबई में
बांद्रा का एक हिन्दू
बांचता है तमाम हिन्दुओं की कुंडली
और दिल्ली के इमाम के पास है
पूरे मुसलमानों की पतरी ।
सब खुश हैं कि
आज तमाम हिन्दू , हिन्दुओं को,
मुसलमां मुसलमानों को ,
सिक्ख , सिक्खों को और
सब अपनी- अपनी बिरादरी को
पूरी तरह पहचानने लगे हैं ।
साठ बरसों में
कोई किसी से
अनजान नहीं रहा
सबकी अपने अपने लोगों से
अच्छी जान पहचान हो गई है ।
जीवेश प्रभाकर
शनिवार, 9 फ़रवरी 2008
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